हर गली गलियारों में
बैठे हैं मंगलमूर्ति
आस्था के पंडालो में।।
गणपति बाप्पा मोरया
हर बच्चा बूढा बोल रहा
ढोल मृदंग की ताल पे
मस्ती के पट खोल रहा।।
कैसे मन को लगाऊँ में
कैसे तेरी महिमा में
अपना शीश नवाऊँ में।।
जब कट रहे हैं शीश वहां
आपस में भाई भाई के
किस मुंह से बाप्पा तेरा





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