Sunday, 8 September 2013


खूब सजे पंडाल यहाँ 

हर गली गलियारों में

बैठे हैं मंगलमूर्ति 

आस्था के पंडालो में।।


गणपति बाप्पा मोरया 

हर बच्चा बूढा बोल रहा

ढोल मृदंग की ताल पे

मस्ती के पट खोल रहा।।


बाप्पा तेरी पूजा में 

कैसे मन को लगाऊँ में 

कैसे तेरी महिमा में 

अपना शीश नवाऊँ में।।

जब कट रहे हैं शीश वहां 

आपस में भाई भाई के

किस मुंह से बाप्पा तेरा 

मीठा मोदक खाऊं में।।


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