Thursday, 30 September 2010

मेरा दावा है


मेरा दावा है

इस बार तुम ढूंढते रह जाओगे वो लोग

जिन्हें तुम मजहब के नाम पे भड़का लिया करते थे

जो तुम्हारे एक इशारे पे

निकल लिया करते थे अपने घरों से

हाथों में तलवार , भाले , मशाल लिए

अपने ही घर को फूंकने

मेरा दावा है

अब समझ गयें हैं

चाल तुम्हारी

हिन्दू भी मुसलमान भी

समझ चुके हैं दोनों मजहब

गीता भी कुरआन भी

मेरा दावा है

Wednesday, 29 September 2010

रघुपति राघव

उगता सूरज
बहता पानी
ईश्वर का है विधान
सदियों पुरानी
अपनी कहानी
अपना प्यारा हिन्दोस्तान
भज प्यारे तू सीता राम
सबको देख रहे हैं राम,
रघुपति राघव राजा राम
पतीत पवन सीता राम
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम
सबको सन्मति दे भगवन
रघुपति राघव राजा राम....

Thursday, 23 September 2010

doshi kaun?

गुनाह तुम करते हो,
दोष देश को देते हो,
आग तुम लगाते हो,
दोष मज़हब को देते हो,
जब वक़्त है हाथों में लेकर
हाथ चलने का,
तब शांति को छोड़कर,
दहशत को चुनते हो,
तुम वो खून हो जो दौड़ता ,
हिन्दोस्तां की नब्ज में,
क्यों खून को निचोड़,
इसमें जहर भरते हो,
ऐसा हो कहीं आपस में,
तुम लड़- कट के मर जाओ,
भारत के तकदीर में ,
अँधेरे को लिख जाओ
अभी भी वक़्त है संभलने का,
भारत तुम से कहता है,
उठो ज़रा नजर डालो,
पडोसी ताक में बैठा है

कौनसा धर्म ?

में निकला भारत की सैर पे ,
मुझे मिला एक इंसान ,
मैंने पुछा कौन हो भैया ,
हिन्दू या मुस्लमान,
मैंने पहले उसे आदाब किया,
फिर कहा भाई राम राम ,
गुस्से में वोह झल्लाकर बोला,
भैया देखो अपना काम,
जात पात को भूल चूका हूँ ,
बहुत लगी है भूक,
इसी जात पात के चक्कर में,
अपना घर चुका हूँ फूक,
गीता कुरआन की कसम खिलाकर,
खिलवाया हमसे खुनी खेल,
वो खुद तो महलों में बैठे हैं,
और हमें दिखाई जेल,

कोन्तिनुए.....