दिन और रात में
उधर लाँघ रहा है पडोसी
सीमा साथ साथ में
इधर खून की होली खेल रही है
सडकों पर टोली समाज की
पढ़ लिख कर भी रह गयी
गंवार जनता आज ही
गंभीर है स्थिति
कुछ तो सोचना होगा
इन वोटों के भिखमंगो को,
जनता को भड़काने से रोकना
होगा,
भड़क उठी जो चिंगारी
अल्लाह कहो या राम
किसी के नाम पर तो रोकना होगा




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