Sunday, 8 September 2013

इधर गिर रहा है रुपया  

दिन और रात में  

उधर लाँघ रहा है पडोसी 

सीमा साथ साथ में 

इधर खून की होली खेल रही है 

सडकों पर टोली समाज की 

पढ़ लिख कर भी रह गयी 

गंवार जनता आज ही 



गंभीर है स्थिति 
कुछ तो सोचना होगा
इन वोटों के भिखमंगो को,
जनता को भड़काने से रोकना 

होगा,
भड़क उठी जो चिंगारी
फिर से मज़हब के नाम पर
अल्लाह कहो या राम
किसी के नाम पर तो रोकना होगा




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