लाल बहादुर शाश्त्री जी के जन्मदिन पर मेरी उनको कविता के रूप में श्रधांजलि
जो ज्ञानी है वो तोलेगा
सोच समझ के बोलेगा
दुनिया लाख उल्हाना दे
बस सच्चाई के पट खोलेगा

भारत माँ के लाल थे
बहादुरी की मिसाल थे
पारंगत थे वो ज्ञानी थे
ऐसे लाल बहादुर शास्त्री थे
छोटा कद था पद बड़ा
जिम्मेदारी का भार पड़ा
कमजोर कड़ी है, बोलते थे
हलके में सब तोलते थे
अम्बार भरा था भोजन का
पर खाली थे बर्तन सारे
जब देश के बच्चे भूके हैं
तो कैसे खाए बच्चे मेरे

एक बखत का खाना छोड़ो
तो कल भरपेट खायेंगे
खेतों की तो बात अलग है
हर इंच में हल चलायेंगे
लाँघ पडोसी सीमो को
कर बैठा फिर गुस्ताखी था
फिर जोर से गरजे शास्त्री जी
बस लाहौर ही था जो बाकी था
जय जवान और जय इसान
शास्त्री जी का नारा था
यहाँ सोने से लहराई धरती
वहां नीच पडोसी हारा था
फिर इसी महानायक को
सबने शत शत नमन किया
जिसे कहते थे कमजोर कड़ी
उसका ही वंदन किया
इति०
मधुर त्यागी
जो ज्ञानी है वो तोलेगा
सोच समझ के बोलेगा
दुनिया लाख उल्हाना दे
बस सच्चाई के पट खोलेगा

भारत माँ के लाल थे
बहादुरी की मिसाल थे
पारंगत थे वो ज्ञानी थे
ऐसे लाल बहादुर शास्त्री थे
छोटा कद था पद बड़ा
जिम्मेदारी का भार पड़ा
कमजोर कड़ी है, बोलते थे
हलके में सब तोलते थे
अम्बार भरा था भोजन का
पर खाली थे बर्तन सारे
जब देश के बच्चे भूके हैं
तो कैसे खाए बच्चे मेरे

एक बखत का खाना छोड़ो
तो कल भरपेट खायेंगे
खेतों की तो बात अलग है
हर इंच में हल चलायेंगे
लाँघ पडोसी सीमो को
कर बैठा फिर गुस्ताखी था
फिर जोर से गरजे शास्त्री जी
बस लाहौर ही था जो बाकी था
जय जवान और जय इसान
शास्त्री जी का नारा था
यहाँ सोने से लहराई धरती वहां नीच पडोसी हारा था
फिर इसी महानायक को
सबने शत शत नमन किया
जिसे कहते थे कमजोर कड़ी
उसका ही वंदन किया
इति०
मधुर त्यागी