में निकला भारत की सैर पे ,
मुझे मिला एक इंसान ,
मैंने पुछा कौन हो भैया ,
हिन्दू या मुस्लमान,
मैंने पहले उसे आदाब किया,
फिर कहा भाई राम राम ,
गुस्से में वोह झल्लाकर बोला,
भैया देखो अपना काम,
जात पात को भूल चूका हूँ ,
बहुत लगी है भूक,
इसी जात पात के चक्कर में,
अपना घर चुका हूँ फूक,
गीता कुरआन की कसम खिलाकर,
खिलवाया हमसे खुनी खेल,
वो खुद तो महलों में बैठे हैं,
और हमें दिखाई जेल,
कोन्तिनुए.....
Aage aur bhi likha jana baki he. Bahut hee stik v yadharth chitran he aaj ka
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